1.5 Early intervention and its significance in education of the visually impaired children with additional disabilities
1.5 Early intervention and its significance in education of the visually
impaired children with additional disabilities
शीघ्र हस्तक्षेप
प्रायः विकलांग व्यक्तियों को उनके मौलिक अधिकारों से वंचित रखा गया| शीघ्र हस्तक्षेप के माध्यम से हम उनको
उनके अधिकारों के प्रति जागरूकता प्रदान कर सकते हैं। शीघ्र हस्तक्षेप के माध्यम से परिवार वाले अपने बच्चों की वृद्धि एवं विकास में भी सहायक हो सकते हैं शीघ्र हस्तक्षेप से हम इन बच्चों की समस्याओं को थोडा कम कर सकते हैं तथा बच्चों की पहचान व आंकलन करके बुद्धि एवं विकास में भी सहायक सिद्ध हो सकते है। इसके माध्यम से हम उन्हें कई प्रकार की सेवाएं भी प्रदान कर सकते हैं यह सेवा हम 0 से 6 वर्ष तक के बालकों को प्रदान कर सकते हैं।
बच्चे के जीवन में पहले के तीन वर्षों का समय बहुत नाजुक होता है, क्यों कि इसी समय पर बच्चा बोलना, चलना आदि सीखता है, और उसी समय उसका सामाजिक विकास भी होता है और यह भी बच्चा अपनी ज्ञानेन्द्रियों के माध्यम से सीखता है तथा सबसे ज्यादा बच्चा देखकर ही सीखता है।
शीघ्र हस्तक्षेप का महत्व
1.
शीघ्र हस्तक्षेप के माध्यम से हम बच्चे के उसके विकास एवं वृद्धि में सहायक हो सकते हैं।
2.
हम उन बच्चों को सहायक उपकरण प्रदान करके विकलांगता के प्रभावों को भी कम कर सकते हैं।
3.
शीघ्र हस्तक्षेप के माध्यम से विकलांगता को आगे बढ़ने से रोका जा सकता है।
4.
इसके माध्यम से हम बच्चे की शिक्षा व आदतों में सुधार ला सकते हैं।
5. प्रारम्भिक हस्तक्षेप पर बल देने का दूसरा महत्वपूर्ण कारण है, माता-पिता के रुख को सकारात्मक बनाने की आवश्यकता है, ताकि वे बच्चों की अक्षमता को स्वीकार कर शीघ्र ही उपयुक्त प्रशिक्षण और उद्दीपन उपलब्ध कराने के प्रयत्न प्रारम्भ कर सकें।
6.
प्रारम्भिक हस्तक्षेप के उचित मार्ग-दर्शन से इन सेवाओं को आसानी से प्रदान किया जा सकता है, इसके लिये उसकी आवश्यक्ता के प्रति जागरूक्ता और इसे प्रदान करने सम्बन्धि जानकारी होनी आवश्यक होती है।
7.
यदि जीवन के प्रारम्भिक वर्षों के दौरान बच्चे को अनुकूल सेवाएं प्राप्त हो जाती हैं, तो बच्चों में और अधिक हानि होने से रोका जा सकता है।
घर एक ऐसा स्थान है, जहाँ बच्चा खुला वातावरण में अपनों के साथ आसानी से कुछ सीख सकता है। अतः इसलिए परिवार वालों का शीघ्र हस्तक्षेप में विशेष योगदान होता है। शीघ्र हस्तक्षेप में शिक्षक का भी महत्वपूर्ण योगदान होता है, क्योंकि शिक्षक बच्चों की विकलांगता
को समझ कर और उसकी ज़रूरतों को समझ कर उसी के अनुरूप शिक्षा देने की कोशिश या चेष्टा
करता हैं।
शीघ्र हस्तक्षेप के लिये एक टीम गठित होती है, जिसमें फिजियो थैरिपिस्ट, Vision Specialest, साइकोलॉजिस्ट आदि शामिल होते हैं इन्ही की सहायता से बच्चा धीरे-धीरे सीखना प्रारम्भ करता है।
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