2.2 Factors responsible for slow learning
2.2 धीमी गति से सीखने के उत्तरदायी कारक
विकासशील देशों में
देखा गया है कि कुपोषण गरीबी अथवा परिवार में अशिक्षा के कारण बच्चों में सीखने के
प्रति रूचि का अभाव तथा सीखने में धीमापन आता है जबकि दृष्टि बाधित बच्चों में इन
कारणों के अतिरिक्त कई बार अनुभवों की कमी प्रारम्भिक हस्तक्षेप का न होना तथा
अनुकरण करके सीखने की अयोग्यता के कारण ही धीमापन दिखाई देता है|
ग्रामीण क्षेत्रों में सामान्यतः बच्चे अधिक आयु में भी प्रारम्भिक
समय पर सीखने में कठिनाई होती है| दृष्टि बाधा के साथ-साथ अन्य कारक भी धीमी गति
से सीखने के लिए उत्तरदायी है—
1. शारीरिक कारक/विकास
2. मानसिक कारक
3. संवेगात्मक कारक
4. वातावरणीय कारक
1. शारीरिक विकास
i) सामान्य से कम
शारीरिक विकास|
ii) शारीरिक दोष|
iii) बीमारियाँ|
iv) कुपोषण|
2. मानसिक या बौद्धिक कारक
i) बालक की निम्न बुद्धि
लब्धि|
ii) दोषपूर्ण मस्तिष्कीय
क्रियाएं|
3. संवेगात्मक कारक
i) बड़ा परिवार|
ii) गरीबी|
iii) विघटित परिवार|
iv) अति महत्वाकांक्षी
,माता-पिता|
v) परिवार का नैतिक
वातावरण|
vi) निवास स्थान का
बार-बार बदलना|
vii) पास-पड़ोस का वातावरण|
4. वातावरणीय कारक
i) विद्यालय का वातावरण
ii) दोष पूर्ण शिक्षण
विधियाँ|
iii) लगातार असफलता|
iv) अनुउपयुक्त पाठ्यक्रम|
v) अप्रशिक्षित अध्यापक|
vi) दोषपूर्ण परीक्षा
पद्धति|
vii) रोजगार सम्बन्धी
असुरक्षा|
viii) परिवारिक कलह|
1. शारीरिक विकास
सामान्य से कम शारीरिक विकास
जिन बालकों का शारीरिक विकास उनकी आयु के
सामान्य बालकों की तुलना में कम होता है तो उन बालकों का अधिगम प्रभावित हो जाता
है| जैसे—3 साल का एक बालक सरलतापूर्वक चलना सीख जाता है परन्तु जिन बालकों में
शारीरिक विकास में कमी होती है वह आसानी से चल-फिर नहीं सकते है|
शारीरिक दोष
जब किसी बालक के शारीर में कोई शारीरिक दोष
पाया जाता है जैसे किसी दुर्घटना या शारीरिक विकृति आदि तब बालक के सीखने की गति
धीमी हो जाती है|
बिमारियों के कारण भी बालक मानसिक रूप से पिछड़
जाता है| यदि बालक हमेशा बीमार रहता है तो उसका ध्यान उस बीमारी में ही लगा रहता
है जिसके कारण बालक के अधिगम में कमी आती है|
कुपोषण
कुपोषण के कारण बालक का मानसिक विकास प्रभावित
होता है जिसके कारण उसके सीखने में कमी पायी जाती है|
2. मानसिक एवं बौद्धिक
कारक
बालक की निम्न बुद्धिलब्धि
जिन बालकों को बुद्धिलब्धि उनकी आयु के अनुसार
नहीं होती है उन बालकों में व्यवहार सामान्य बालकों की अपेक्षा भिन्न होता है| जैसे-बालक की आयु 15 वर्ष होने पर भी उसका व्यवहार 5 वर्ष के बालक की भांति होता
है तो वह बालक अधिगम में पिछड़ जाता है|
दोष पूर्ण मस्तिष्क क्रियायें
जब बालक स्वयं से विचार करने में अक्षम होता
तथा वह एकाग्रचित नहीं होता है और अपनी सूझ-बूझ से कोई निर्णय लेने में अक्षम होता
है तो इस प्रकार के बालकों की सीखने की गति धीमी हो जाती है|
3. संवेगात्मक कारक
बड़ा परिवार
जब बालक का परिवार बड़ा होता है तो उस बालक के
माता-पिता बालक पर उचित ध्यान नहीं दे पाते हैं जिसके कारण बालक की आवश्यकताओं की
पूर्ति नहीं हो पाती है और वह पिछड़ जाता हैं|
गरीबी
गरीबी पिछड़ापन का प्रमुख कारण है क्योंकि गरीबी
के कारण माता-पिता अपनें बच्चों को विद्यालय नहीं भेज पाते है जिसके कारण ये बच्चे
सीखने में पिछड़ जाते है|
विघटित परिवार
संयुक्त परिवार में या कभी-कभी छोटे परिवार में किन्हीं कारण वश विघटन होने लगता है जिससे बालक प्रभावित होता है|
अति महत्वाकांक्षी माता
कुछ माता-पिता अपने बालक की क्षमता से अधिक की अपेक्षा करने लगते हैं जो कि बालक की मानसिक क्रिया तथा सीखने की गति में बाधक हो जाती हैं|
निवास स्थान का बार-बार बदलना
किसी एक स्थान पर स्थिरता न होना अर्थात बार-बार बालक के रहने के स्थान पर परिवर्तन किया जाना भी उनमें सीखने की गति को कमजोर कर देती है|
परिवार का नैतिक वातावरण
परिवार के सदस्यों द्वारा एक-दूसरे के साथ उचित एवं सम्मानीय व्यवहार
न होने पर बालक भी वैसा ही व्यवहार करता है जिसके कारण बालक सीखनें में पिछड़ जाता
है|
पास-पड़ोस का वातावरण
यदि आस-पास का वातावरण सही नहीं है वह भी बालक की विकासात्मक अवरोध का प्रमुख कारण बनती है|
4. वातावरणीय करक
दोषपूर्ण शिक्षण विधियाँ
कक्षा में अध्यापक द्वारा बालक की आयु व मानसिक
क्षमता के अनुसार उपयुक्त शिक्षण विधियों का प्रयोग न करने पर बालक शैक्षिक
क्रियाकलाप में पिछड़ जाता है|
लगातार असफलता
लगातार असफल होने के कारण भी बालक के मन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है जिसके कारण वह किसी भी कार्य को पुरे मन से नहीं करता और असफल हो जाता है और धीमी गति से सीखने के लिए उत्तरदायी है|
अनुपयुक्त पाठ्यक्रम
अनुपयुक्त पाठ्यक्रम का तात्पर्य है पाठ्यक्रम का बालक के अनुरूप न होना| अर्थात पाठ्यक्रम को सही प्रकार से व्यवस्थित न कर पाना भी बालक में विषय के प्रति रूचि उत्पन्न नहीं कर पाती और सीखने की गति मंद हो जाती है|
अशिक्षित अध्यापक
कभी-कभी अध्यापक बालक की आवश्यकतानुसार उचित शिक्षण-प्रशिक्षण नहीं दे पाते, जिसके फलस्वरूप बालक का मानसिक विकास पिछड़ जाता है|
दोषपूर्ण परीक्षा विधि
बालक की परीक्षा विधि इस प्रकार से होनी चाहिए कि वह निरन्तर सीखने के लिए उत्तरदायी हो तथा प्रोत्साहित हो और बालक में सीखने का अधिगम धीमी गति से न हो|
पारिवारिक कलह
परिवारिक कलह से तात्पर्य बच्चे के परिवार में या माता-पिता में किसी भी प्रकार का अनबन होने के कारण उसमें मानसिक विकास मंद होने लगता है जिससे उसमें अधिगम की क्रिया भी धीमी हो जाती है|
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