3.1 Learning disability – Concept, educational implications and teaching strategies D.Ed. (V.I.) 3rd semester
Unit
3: Visually Impaired Children with Cognitive Deficits
दृष्टिबाधा के साथ भिन्न-भिन्न विकलांगताएं
3.1 Learning disability – Concept, educational implications and teaching strategies
3.1 अधिगम अक्षमता: अवधारणाएँ, शैक्षिक समस्याएँ एवं शैक्षिक रणनीतियाँ
अधिगम अक्षमता
यह एक छिपी हुई विकलांगता होती है| अधिगम में सीखने की
क्षमता प्रभावित होती है| अधिगम विकलांग बच्चों को पढ़ने, वर्तनी सिखने और गणित जैसे विशेष क्षेत्रों
में सीखने सम्बन्धी कठिनाइयों का अनुभव होता है| यह समस्या बाल्यावस्था एवं
विद्यालय के प्रारम्भिक दौर में पहचानी जा सकती है| इन बालकों की बुद्धि लब्धि औसत से कम नहीं
होती है किन्तु इनकी उपलब्धि का प्राप्तांक कम होता है| साधारणतः इनकी बुद्धि लब्धि 90 से ऊपर ही होती है| अधिगम अक्षम बालकों में अधिकांशतः स्मृति एवं
प्रत्यक्षीकरण की समस्या देखी जाती है|
परिभाषा
NJCLD
(National Joint Committee for Learning Disabilities) के अनुसार
“अधिगम
विकृति एक सामान्य पहलू है, जो विभिन्न प्रकार की विकृतियों
के समूह को चिन्हित करता है तथा सपष्ट रूप से सुनने, बोलने, पढ़ने, लिखने, तार्किकता, क्षमता को धारण करने वा उपयोग
करने की कठिनाई को प्रकट करना|”
परिभाषा
“यदि कोई व्यक्ति नियमित शिक्षण कार्यक्रम से लाभान्वित नहीं
है, वह सामाजिक रूप से वंचित नहीं है एवं वह किसी प्रकार की दैनिक क्रियाकलापों
में बाधा के कोई स्पष्ट लक्षण प्रकट नहीं होते, तो उसे अधिगम विकृति के रूप में चिन्हित किया जा सकता है|”
अधिगम अक्षमता के प्रकार
1. Dyslexia पढ़ने सम्बन्धी दोष
2. Dysgraphia लेखन सम्बन्धी दोष
3. Dyscalculia गणित सम्बन्धी दोष
4. Aphasia सम्प्रेषण और भाषा सम्बन्धी दोष
विभिन्न कौशलों में उप्लब्धि के आधार पर अधिगम अक्षमता को कई भागों में बांटा गया है--
(I) Dyslexia (पठन सम्बन्धि दोष)
इसके अन्तर्गत बालक को सही तौर पर और शीघ्रता से शब्द पहचानने में कठिनाई होती
है| उनकी वर्तनी और डिकोडिंग क्षमताएँ कमजोर होती हैं| Dyslexia बालक धीरे-धीरे पढ़ता है अक्सर अक्षरों, शब्दों और समस्याओं को उल्टा समझता है| बालक
पढ़ते समय अनुमान के आधार पर चलता है जिससे पाठ के शब्द छूट जाते हैं या कभी-कभी उन्हें
पढ़ लेता है|
इसके अंतर्गत बच्चों में विभिन्न शैक्षिक समस्याएँ दिखाई देती हैं--
1. अक्षरों को न पहचानना|
2. अशुद्ध रूप से पढ़ना|
3. सही रूप में अर्थ के साथ
न पढ़ पाना|
4. सही उच्चारण न कर पाना|
5. दाएं एवं बाएं की अभिव्यक्तिकरण में समस्या|
6. जटिल भाषा कौशल के प्रयोग में जैसे--व्याकरण आदि में समस्या होना|
7. यदि बच्चे में पढ़ने की अक्षमता है, तो वह सम्पूर्ण जीवन तक उपस्थित रहती है|
(II) Dysgraphia (लेखन सम्बन्धि दोष)
लेखन सम्बन्धी दोष, स्नायु तंत्रीय दोष
है जिसमें हस्तलेख, क्षमताओं को प्रभावित करने वाले
गामक कौशलों में विशेष कठिनाई का सामना करना पड़ता है| इन बच्चों की लिखावट काफी
खराब होती है| लेखन में वाक्य संरचना सम्बन्धी दोष व्याकरण दोष पाए जाते हैं| गामक
लेखन दोषों के कारण नकल करने में भी कठिनाई होती है|
इसके अंतर्गत बच्चों में विभिन्न शैक्षिक समस्याएँ दिखाई देती हैं--
1. अक्षरों को उलट देना जैसे M को W लिखना|
2. शब्दों के अक्षरों को उलट देना जैसे कमल को कलम|
3. अपनी बातों या बीती घटनाओं को लिख कर व्यक्त नहीं कर पाना|
4. शब्दों या घटनाओं को क्रम-बद्धता से नहीं लिख
पाना|
5. अंग्रेजी में बड़े अक्षरों एवं छोटे अक्षरों के प्रयोग में हमेशा गलती करना|
6. श्यामपट या कापी से नकल करने
में परेशानी होना|
(III) Dyscalculia (गणित सम्बन्धि दोष)
गणित सम्बन्धी विकार एक ऐसी विशिष्ट अधिगम विकलांगता है जिसमें इसमें संख्याओं
को समझने, संख्याओं में हेर-फेर
करने तथा गणितीय तथ्य सीखने में कठिनाई जैसे लक्षण प्रदर्शित होते है|ऐसे बच्चे
जोड़, घटाना, गुणा, भाग जैसे प्रारम्भिक
कौशलों में कमी दर्शाते हैं|
इसमें बच्चा गणित सम्बन्धि गलतियाँ करता है जैसे--अंकों को उलटा लिखना अर्थात्, 6 को तीन लिखना और दो अंकों की संख्या को पलट देना जैसे-- 36 को 63 लिखना, 99 को 66 लिखना आदि|
(IV) Aphasia (वाणी सम्बन्धि दोष)
ये एक ऐसा विकार है जो सम्प्रेषण में कठिनाइयाँ प्रस्तुत करता है| इसमें मौखिक
और लिखित भाषा को समझने और व्यक्त करने की क्षमता प्रभावित होती है| कुछ अधिगम
विकलांग बच्चों को उनसे जो कुछ कहा जाए उसका अर्थ समझने में कठिनाई हो सकती है| उन्हें
निर्देशों का पालन करने या कहानियों और वार्तालाप में घटनाओं के क्रम को याद रखने
में कठिनाई होती है|
इसके अंतर्गत बच्चों में विभिन्न शैक्षिक समस्याएँ दिखाई देती हैं--
1. एक दूसरे को पुस्तिका से सरल शब्दों को भी देखकर
लिखने में कठिनाई महसूस करते हैं|
2. सरल वाक्यों पर अधिक निर्भर रहना|
3. उच्चारण सम्बन्धी कठिनाइयों के कारण सम्प्रेषण में
समस्या|
बच्चों में इसकी कमी से बोलने तथा चलने-फिरने में समस्या होती है--
1. आंखों के संचार में कमी जैसे--पूरे सिर को घुमाकर देखना, बर्तनों में भोजन करने
में तथा कप को पकड़ने में समस्या होना, चलने, कूदने, उछलने, गेन्द को फेकने एवं पकड़ने में तथा गाड़ी चलाने में समस्या
होना|
2. भाषा एवं वाणी के प्रयोग
में देरी|
3. किसी वस्तु को बाएं से दाएं करने में कमी|
4. सूक्ष्म गामक कौशल जैसे--जूते का फीता बांधने एवं कपड़े के बटन बन्द
करने में कमी|
5. स्पर्ष सम्वेदना में असामंजस्य जैसे--कपड़े पहनने, बाल बनाने तथा नाखून काटने इत्यादि में समस्या होना|
6. दिशा का सही ज्ञान न होना|
7. हम-उम्र बच्चों के साथ सामाजिक समायोजन में कमी|
8. इनमें डर या विचित्र व्यवहार का दिखाई देना|
9. घर के क्रिया-कलापों को करने में कठिनाई होना|
10. तैयार होने के कौशल में कमी|
लक्षण
1. संचार विकृति|
2. ग्रहणशील भाषाई विकृति|
3. पठन भाषाई कौशल में कमी|
4. लेखन कौशल में कमी|
5. गणितीय कौशल में कमी|
6. तार्किक क्षमता में कमी|
7. संगठित करने के कौशल में कमी|
8. स्मरण एवं चिन्तन कौशल में कमी|
शैक्षिक रणनीतियाँ
1. अधिगम अक्षम बालकों को शिक्षा के लिए विशेष अध्यापक को व्यवस्था की जाए|
2. इन बालकों को शैक्षिक उपलब्धि प्राप्त करने के लिए पर्याप्त समय दिया जाना
चाहिए|
3. बार-बार दोहराने की रणनीति अपनानी जाये|
4. प्रोत्साहित करने वाले मॉडल वस्तुओं जैसे—बटन, कंचे और गोलियों के द्वारा
अभ्यास कराने को प्राथमिकता दी जाए|
5. अध्यापक धैर्य के साथ उचित पाठ्यक्रम प्रयोग करें|
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