Paper Code 109) U. 1.3 Current status of education of visually impaired child with additional disabilities D.ED 3rd Sem.
1.3 Current status of education of
visually impaired child with additional
disabilities
दृष्टिबाधा के साथ अतिरिक्त विकलांगता वाले बालकों की शिक्षा
दृष्टिबाधा तथा अन्य विकलांगताओं के साथ शिक्षण-प्रशिक्षण एक चुनौतीपूर्ण कार्य है| सामान्यतया, सामान्य बालको की अधिकांश शैक्षिक आवश्यकतायें सामान्य होती है| किन्तु विकलांग बालकों की विशेष स्थिति के कारण उनकी आवश्यकतायें या शैक्षिक आवश्यकतायें भी विशिष्ट हो जाती हैं| यह स्थिति और अधिक गंभीर हो जाती है जब बालक बहुविकलांग हो|
बहुविकलांग बालकों को दी जाने वाले शिक्षा की प्रणाली हमारे देश में अभी नई हैं| अभी हम बहुविकलांग बच्चों को बहुत निम्न स्तर की शिक्षा उपलब्ध हो पा रही है| दृष्टिबाधा के साथ अतिरिक्त विकलांगता वाले बालकों के समक्ष गंभीर शैक्षिक परिस्थितियां प्रस्तुत करती हैं| यह स्थिति अध्यापकों के लिए भी कम चुनौतीपूर्ण नहीं है| भारत सरकार ने 1981 को अंतर्राष्ट्रीय विकलांगता वर्ष घोषित करते हुए विकलांगजनों की शिक्षा पर अधिक ध्यान देना प्रारम्भ किया| 1983-1992 तक विकलांगजन दशक घोषित करते हुए| इन वर्षों में विकलांगजनों को अधिक से अधिक शैक्षिक सुविधायें देने का प्रयास किया गया| 1986 में आयी नई शिक्षा नीति में भी इन बालकों को शामिल किया गया है|
निःशुल्क और अनिर्वाय शिक्षा जो 14 साल तक के बच्चों के लिए थी 16 वर्ष कर दिया गया| विशेष शिक्षकों को इस तरह का प्रशिक्षण दिया जा रहा है जिसके माध्यम से वे दृष्टि बाधा के साथ अन्य विकलांगताओं वाले बालकों को शिक्षित-प्रशिक्षित कर सके|
बहुविकलांग वाले बालकों के लिए एक राष्ट्रीय संस्थान NIEPMD (National
Institute for Empowerment of person with multiple Disabilities) की स्थापना चेन्नई में की गयी है यह बहुविकलांग बालकों को शिक्षा प्रदान करने के साथ उन्हें रोजगार परख प्रशिक्षण भी दिया जाता है| विकलांग बालकों के लिए भारत सरकार SSA, PIED, एवं IEDC जैसी योजना का संचालन कर रही है|
बहुविकलांग बालकों की गंभीर समस्या को देखते हुए मुक्त एवं दूरस्थ शिक्षा को व्यवस्था भी की गयी है| इस व्यवस्था के अन्तर्गत शिक्षार्थी अधिकतर अपने घर बैठे ही पत्राचार, रेडियो, टेलीविजन आदि की सहायता से पढ़ सकता है| सामान्य शिक्षा व्यवस्था में ऐसी अनेक बाधायें हैं जो विकलांग बालक के द्वारा शिक्षा ग्रहण करने में अपनी नकारात्मक भूमिका निभाते हैं| इस स्थिति में कुछ विशेष संस्थाओं का चयन किया गया| इन्हें वंचितों की शिक्षा विशेष संस्थाओं का नाम दिया गया है| संक्षेप में इन्हें Saied कहा जाता है| SAIED (Special Accredited Institution for Education of the Disadvantaged)
इन विशेष संस्थाओं में भी ऐसे पाठ्यक्रम का चुनाव किया गया जो कि वंचित वर्ग के लिए अधिक उपयोगी हो सके| इसके अतिरिक्त CBR कार्यक्रम (Community Based Rehabilitation) (समुदाय आधारित पुनर्वास) संचालित करना जो बहुविकलांगता सिद्धांत पर आधारित हो|
बहुविकलांग बच्चों को सीखने के लिए निम्न दक्षता कौशल विकसित करने की आवश्यकता होती है|मूर्त तथा अमूर्त अधिगम और प्रत्ययों के समझने में कठिनाई होती है| जिससे इन बालकों का शिक्षण प्रभावित होता है अतः किसी भी योजना तथा कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए आवश्यक है कि इन लक्ष्यों तथ्यों पर विशेष ध्यान दिया जाये|
1.
विशेष अध्यापकों का किसी एक ही विद्यालय में प्रशिक्षित बहु विकलांग बालकों की शिक्षा में नकारात्मक भूमिका निभाता है|
2.
अधिकांशा विकलांगता ग्रामीण क्षेत्रों में पायी जाती हैं जहाँ मूलभूत आवश्यकतायें जैसे—स्वास्थ्य एवं शिक्षा ही नहीं उपलब्ध हो पाते वहा बहुविकलांग बालकों की शिक्षा एक गंभीर चुनौती है|
3.
दूर-दराज एवं शहरी क्षेत्रों में विद्यालय होने के कारण छात्र वहां तक पहुँच नहीं पाते|
4. 0-6 वर्ष तक के बालक सेन्टर तक नहीं पहुँच पाते जिससे उनका विकास नहीं हो पाता है|
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