Paper Code-108) Unit I: Nature and Emerging Priorities of Education Unit 1.1. Meaning, Definition and Scope of Education D.Ed. 3rd Semester (Paper 108)
Education in Emerging Indian Society
and School Administration
उभरते भारतीय समाज में एवं विद्यालय प्रशासन में शिक्षा
Unit I: Nature and Emerging Priorities of Education
शिक्षा की उभरती प्राथमिकताएं एवं प्रकृति
शिक्षा एक महत्वपूर्ण और सर्वव्यापी विषय है। यह मानव की एक विशेष उपलब्धि है। प्रारम्भ में शिक्षा एक जैविक आवश्यकता के रूप में विकसित हुई। परन्तु वातावरण से निरन्तर संघर्ष करते हुए मानव ने जीना सीखा और क्रमशः सामूहिक प्रयासों से अपना एक समाज गठित किया। परिवार की जीवन सम्बन्धी भौतिक कार्यों पर ध्यान केन्द्रित कर उसने अपने ज्ञान और अनुभव की पूँजी से वृद्धि की। अपनी इच्छाओं और आकाँक्षाओं को पहचाना और उन्हें अभिव्यक्ति करना सीखा और इस तरह मानव ने अपनी मानसिक शक्तियों का विकास किया।
शिक्षा के प्रति आज जितनी रुचि है, उतनी पहले कभी नहीं थी। मानव शिक्षा को भविष्य की दृष्टि से देख रहा है, क्योंकि आज की शिक्षा विकास की अगुवाई कर रहा है।
शिक्षा के लिये यह चुनौतीपूर्ण समय है, क्योंकि शिक्षा का अब तक का कार्य समकालीन समाज को उसी रूप में जीवित रखना और उसके सामाजिक सम्बन्धों को बनाए रखना था। परन्तु आज उसका लक्ष्य अपरिचित बालकों को अपरिचित दुनिया के लिए शिक्षित करना है।
अतः शिक्षा-शास्त्रियों के ऊपर आज वह दायित्व आ गया है, कि जिसके द्वारा उन्हें भविष्य का निर्माण करना होगा।
1.1. Meaning, Definition and Scope of Education
1.1. शिक्षा का अर्थ, परिभाषा एवं क्षेत्र
शिक्षा एक ऐसी प्रक्रिया है, जो मनुष्य की जन्म जात शक्तियों के स्वभाविक और सामंजस्य पूर्ण विकास में सहयोग देती है। व्यक्ति की व्यक्तित्वता का पूर्ण विकास करती है, उसे वातावरण से सामन्जस्य स्थापित करने में सहायता देती है| जीवन और नागरिकता के कर्तव्यों और दायित्वों के लिये तैयार करती है एवं उसके व्यवहार, विचार और दृष्टिकोण में ऐसा परिवर्तन करती है जो समाज, देश और विश्व के लिये हितकर होता है।
एडम्स (Edams) महोदय ने शिक्षा को द्वी-ध्रुवीय प्रक्रिया माना है, जिसमें एक ध्रुव पर सिखाने वाला अर्थात्, शिक्षक होता है तथा दूसरे ध्रुव पर सीखने वाला अर्थात्, शिक्षार्थी होता है।
वर्तमान समय में शिक्षा ही जीवन है, ऐसा समप्रत्यय प्रोफेसर जान डी. वी, ने स्वीकार कर प्रसारित किया है, जिसे भारत तथा अन्य देशों के शिक्षा विद्वानों ने भी माना है। अतः शिक्षा समाज के पुनः नर्माण की क्रिया है।
Meaning of Education
शिक्षा का अर्थ
शिक्षा के अर्थ को स्पष्ट करने में विभिन्न विचारकों, चिन्तकों , विद्वानों, दार्शनिकों आदि ने अपने-अपने दर्शन तथा समाज की स्थिति के संदर्भ में अपने विचार रखे हैं।
अंग्रेजी भाषा के शब्द Education शब्द की उत्पत्ति लैटिन भाषा के Educatum शब्द से मानी जाती है। Educatum शब्द दो शब्दों ई (E) तथा ड्यूको (Duco) से मिल कर बना है। E का अर्थ है आन्तरिक तथा Duco का अर्थ है, बाहर निकालना।
अतः Education का शाब्दिक अर्थ है आन्तरिक शक्तियों को बाहर निकालना अथवा विकास करना।
शिक्षा का व्यापक अर्थ
शिक्षा के व्यापक अर्थ के अनुसार यह सारा संसार शिक्षा क्षेत्र है। प्रत्येक व्यक्ति, बालक, युवा, वृद्ध, स्त्री-पुरुष सभी शिक्षार्थी हैं। ये सब जीवन पर्यन्त कुछ न कुछ सीखते हैं| अतः व्यक्ति का सारा जीवन उसका शिक्षा काल है। व्यापक अर्थ में शिक्षा प्राप्त करने तथा प्रदान करने का कोई निश्चित स्थान नहीं है। घर, बाजार, स्कूल तथा खेल-कूद के मैदान आदि समस्त स्थानों पर यह स्वतः प्राप्त होती रहती है।
प्रो. डम्बिल के अनुसार
“शिक्षा के व्यापक अर्थ में वे सभी प्रभाव आते हैं, जो व्यक्ति को जन्म से लेकर मृत्यु तक प्रभावित करते हैं|”
J. S. Machzine के अनुसार
“व्यापक अर्थ में शिक्षा एक ऐसी प्रक्रिया है, जो आजीवन चलती रहती है और जीवन के प्रायः प्रत्येक अनुभव से उसके भण्डार में वृद्धि होती है। शिक्षा को जीवन का मुख्य साध्य भी कहा जा सकता है|
शिक्षा का संकुचित अर्थ
शिक्षा के संकुचित अर्थ के सम्बन्ध में कुछ विद्वानों का विचार है कि शिक्षा एक निश्चित समय या उम्र पर जाकर समाप्त होती का पाठ्यक्रम है|
दूसरे शब्दों में,
“संकुचित शिक्षा विद्यालय में एक निश्चित समय अवधि में एक निश्चित लक्ष्य को पूर्ण करने वाली शिक्षा है”
J. S. Machzine ने संकुचित शिक्षा को इस प्रकार व्यक्त किया है
“संकुचित अर्थ में शिक्षा का अभिप्राय, हमारी शक्तियों के विकास और उन्नति के लिए किए गए किसी भी प्रयास से हो सकता है।”
प्रो. ड्रेवर के अनुसार
“शिक्षा एक प्रक्रिया है, जिसमें बालक के ज्ञान, चरित्र तथा व्यवहार को एक विशेष ढाँचे में ढाला जाता है।”
शिक्षा की परिभाषाएं-
अरस्तु के अनुसार
“स्वस्थ शरीर में स्वस्थ मस्तिष्क का सृजन ही शिक्षा है।”
प्लेटो के अनुसार
“शिक्षा शारीरिक, मानसिक व बौद्धिक विकास की एक प्रक्रिया है।”
हर्बर्ट स्पैन्सर के अनुसार
“शिक्षा पूर्ण जीवन है।”
हर्बर्ट स्पैन्सर के अनुसार
“शिक्षा नैतिक चरित्र का उचित विकास है।”
महात्मा गान्धी के अनुसार
“शिक्षा से मेरा तात्पर्य उस प्रक्रिया से है, जो बालक एवं मनुष्य के शरीर एवं आत्मा के सर्वोत्कृष्ट रूपों के प्रस्फूटित कर दे।”
Word के अनुसार-
“शिक्षा का अर्थ प्राप्त ज्ञान का स्वभाविक वितरण है।”
कौटिल्य के अनुसार
“शिक्षा का अर्थ है, देश के लिये प्रशिक्षण तथा राष्ट्र के लिये प्रेम।”
शंकराचार्य के अनुसार
“शिक्षा आत्मानुभूति के लिए है।”
शिक्षा का विषय क्षेत्र
शिक्षा का क्षेत्र अति विस्तृत है। शिक्षा का अर्थ व्यक्ति का सर्वाँगीण विकास है। अतः शिक्षा का सम्बन्ध मोटे तौर पर जीवन के प्रत्येक पक्ष से होता है। शिक्षा के क्षेत्र में निम्नलिखित विषयों का अध्ययन होता है|
1. शिक्षा के सिद्धान्तों का विवेचन
शिक्षा सिद्धान्तों के विवेचन में सामान्यतः शिक्षा का उद्देश्य, शिक्षा का पाठ्यक्रम, शिक्षण विधियाँ, शिक्षा का स्वरूप, शिक्षण का प्रबन्धन, मूल्याँकन एवं शिक्षार्थी के व्यक्तित्व का विकास इत्यादि सम्मिलित होता है।
2. दर्शन-शास्त्र
शिक्षा दर्शन शिक्षा शास्त्र का एक महत्वपूर्ण अंग है। शिक्षा मानव जीवन की एक ऐसी क्रिया है, जो सदैव सक्रीय रहती है। दर्शन इस प्रक्रिया को सुसंगत आधार प्रदान करता है।
3. शिक्षा मनोविज्ञान
शिक्षा मनोविज्ञान वर्तमान युग में शिक्षा शास्त्र का एक महत्वपूर्ण अंग माना जाता है।
स्किनर के अनुसार
“मनोविज्ञान मानवीय व्यवहारों का शैक्षिक परिस्थितियों में अध्ययन है।”
4. शैक्षिक समाज
मानव एक सामाजिक प्राणी है शिक्षा और समाज शास्त्र दोनों सामाजिक सन्दर्भ में व्यक्ति के विकास के विभिन्न पक्षों और अनुभवों का विवेचन करते हैं। विकास की इस प्रक्रिया में समाज, परिवार, समुदाय, विद्यालय एवं राज्य आदि का योगदान रहता है।
5. शैक्षिक उपलब्धि मापन और मूल्याँकन
किसी शिक्षार्थी की शैक्षिक उपलब्धि का स्तर क्या है, अर्थात् शैक्षिक उपलब्धि के मापन या परीक्षण का अर्थ यह निर्धारित करना है, कि किसी विशेष पाठ या विषय में छात्र ने किस मात्रा में कौशल या परिमाणता अर्जित की है|
6. पर्यावरणीय शिक्षा
शिक्षा-शास्त्र की अध्ययन सामग्री में पर्यावरणीय शिक्षा का होना यह बताता है, कि पर्यावरण के प्रति जागरूकता उत्पन्न करने की अत्यंत आवश्यकता है और यह जागरूकता बच्चों से ले कर समाज के सभी आयु, वर्गों व क्षेत्रों में फैलानी चाहिए। पर्यावरण के प्रति जागरूकता विद्यालयों एवं महाविद्यालयों की शिक्षा का अंग होना चाहिये।
7. जनसंख्या शिक्षण
शिक्षा-शास्त्र के आधुनिक विषय सामग्री के अंतर्गत जनसंख्या शिक्षण का महत्वपूर्ण अंग है।
विश्वविद्यालय आयोग अनुदान के अनुसार
“जनसंख्या शिक्षण छात्र समुदाय में जनसंख्या की गतिशीलता निर्धारित कार्यक्रमों तथा लघु परिवार की अवधारणा को समझने का माध्यम है, जिससे छात्र जनसमुदाय पर पड़ रहे बढ़ती जनसंख्या के प्रभाव से अवगत हो जाये।”
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