Skip to main content

Part 5 Paper Code-110 Hindi State Language D.Ed. (V.I.) शिक्षण सूत्र

 

शिक्षण सूत्र

शिक्षण के कुछ सामान्य सिद्धांतों के अतिरिक्त शिक्षाविदों ने अपने प्रयोगों के आधार पर कुछ सूत्रों का प्रतिपादन किया है जिन्हें शिक्षण सूत्र कहते हैं| शिक्षण प्रक्रिया के दौरान इन सूत्रों का उपयोग करने से शिक्षक अपने शिक्षण कार्य को अधिक सुगम, सरल, स्पष्ट, एवं रोचक बना सकते हैं, शिक्षण सूत्र इस प्रकार हैं

1. ज्ञात से अज्ञात की ओर

इसका तात्पर्य यह है कि बालकों को जो ज्ञान प्राप्त है उसी पर नये ज्ञान की आधार शिला रखी जाए अर्थात जो कुछ बालक जानते हैं उसी को आधार बनाकर वह सिखाना चाहिए, जो वह नहीं जानते हैं|

उदाहरणशाहजहां के बारे में पढ़ाते समय ताजमहल से शुरू करना चाहिए क्योंकि ताज ताजमहल ज्ञात है और शाहजहां अज्ञात|

ज्ञात और अज्ञात के बीच का संबंध स्पष्ट हो जाने से बालक की रूचि आगे के ज्ञान के लिए जागृत हो जाती है|

2. सरल से जटिल की ओर

बालक को पहले सरल का ज्ञान देना चाहिए, उसके बाद स्तर र स्तर आगे बढ़ते हुए जटिल को समझना चाहिए| हमारे देश में प्राथमिक स्तर का पाठ्यक्रम उसी सूत्र को ध्यान में रखकर निर्मित किया गया है| सामान्यतः अध्यापक को सदैव बालक को पहले वह सिखाना चाहिए जिसे वे सरलता से सीख सकें|

उदाहरणवर्णों या अक्षरों का ज्ञान, शब्दों का ज्ञान और फिर वाक्यों का ज्ञान प्रदान करना चाहिए|

3. मूर्त से अमूर्त की ओर

इस सिद्धांत के अनुसार यह हमेशा ध्यान रखना चाहिए कि शिशु का मानसिक विकास इतना नहीं होता कि वह सूक्ष्म या अमूर्त को समझ सके| केवल दृश्यमान वस्तुओं के द्वारा ही उनमें सूक्ष्म को समझने की क्षमता का विकास किया जा सकता है इस शक्ति के विकास के लिए मूर्त से अमूर्त के सूत्र को ध्यान में रखना चाहिए|

4. पूर्ण से अंश की ओर

इस सूत्र के अनुसार बालक जो कुछ भी सिखाया जाए उसे पहले पूर्ण रूप से सामने रखा जाए और बाद में उसके अंश या भाग विशेष को स्पष्ट किया जाए| यह सूत्र Guestal मनोविज्ञान पर आधारित है जिसके अनुसार हम पहले पूर्ण का प्रत्यक्षीकरण करते हैं और फिर उसके अंशों अंगों का|

भाषा विकास में भी बालक वाक्यों को एक इकाई के रूप में सीखता है और उसके अलग-अलग अंशों पर बाद में ध्यान देता है|

यहां पर ध्यान रखना आवश्यक है कि पूर्ण का यह ज्ञान जटिल नहीं होना चाहिए|

5. विशेष से सामान्य की ओर

बालक को विशेष ज्ञान से सामान्य ज्ञान की ओर ले जाना चाहिए अर्थात पहले उदाहरण प्रस्तुत किए जाये और फिर उनको उदाहरणों के आधार पर सामान्य नियम बनाए जायें|

6. आगमन से निगमन की ओर

इसके अनुसार कई प्रकार के उदाहरण प्रस्तुत करके नियमों का निर्धारण किया जाता है शिक्षक इस सूत्र का प्रयोग विभिन्न विषयों के शिक्षण में कर सकते हैं भाषा में व्याकरण के पाठ का अध्ययन करवाने के लिए इस सूत्र का प्रयोग इस प्रकार किया जा सकता है

1. विभिन्न वाक्य लेकर उसमें विशेष नाम बताने वाले शब्दों को छांटने के लिए कहा जाएl

2. वाक्य लिखवा कर उसमें से संज्ञा शब्द छांटने को कहा जाए|

इस सूत्र के अनुसर से बालक की रुचि शिक्षण में जागृत रहती है साथ ही प्रत्येक स्तर पर कार्य करने के पश्चात उसे आगे कार्य करने की प्रेरणा भी मिलती है इस सूत्र में शिक्षक को अधिक कार्य करना पड़ता है परंतु इसके द्वारा शिक्षार्थी का अधिगम स्थाई और सार्थक रहता है|

Comments

Popular posts from this blog

अल्प दृष्टि की परिभाषा PWD Act के अनुसार

“ ऐसा व्यक्ति , जिसके उपचार के उपरान्त भी दृष्टि क्षमता का ह्रास हो गया हो , परन्तु वह सहायक युक्तियों के माध्यम से किसी कार्य की योजना बनाने अथवा निष्पादन के लिये दृष्टि का उपयोग करता है या उपयोग करने में सक्षम है और उसकी दृष्टि तीक्ष्णता 6 / 18 या 20 / 70 है , तो उसे अल्प दृष्टि वाला व्यक्ति कहा जाएगा। ” PWD Act की इस परिभाषा में दृष्टि तीक्ष्णता के स्थान पर सहायक उपकरणों की सहायता से दृष्टि के उपयोग की क्षमता पर बल दिया गया है।

Paper Code 103) D.Ed. (VI) Unit 1: Expanded Core Curriculum 1.1 Concept of expanded core curriculuam जमा/विस्तारित पाठ्यक्रम की अवधारणा

1.1          Unit 1: Expanded Core Curriculum पाठ्यक्रम पाठ्यक्रम शब्द अंग्रेजी भाषा के Curriculum शब्द का हिन्दी रूपान्तण है। Curriculum शब्द लैटिन भाषा   से लिया गया है तथा Curriculum शब्द लैटिन भाषा के शब्द Currer (क्यूरेर) से बना है जिसका अर्थ है, दौड़ का मैदान। दूसरे शब्दों में Curriculum वह क्रम है जिसे किसी व्यक्ति को अपने गन्तव्य स्थान पर पहुँचने के लिए पार करना होता है। मुनरो के अनुसार “ पाठ्यक्रम में वे सब क्रियाएं सम्मिलित हैं, जिनका हम शिक्षा के उद्देश्यों की परिकल्पना के लिए विकलांगो में उपयोग करते हैं। ” अतः पाठ्यक्रम वह साधन है, जिसके द्वारा शिक्षण जीवन के लक्ष्यों की प्राप्ति होती है। जिसके आधार पर शिक्षार्थी के   व्यक्तित्व का विकास होता है| तथा वह नवीन ज्ञान एवं अनुभवों को प्राप्त करता है। 1.1    Concept of expanded core curriculuam जमा / विस्तारित पाठ्यक्रम की अवधारणा जमा पाठ्यक्रम दृष्टिबाधित बालकों के लिए कोई अतिरिक्त पाठ्यक्रम नहीं है, अपितु दृष्टिबाधा के कारण दृष्टिबाधित बालकों में जो कमी आई है उस...

Model Paper : 103 III Teaching of Expanded Core Curriculum Model Paper: 1

  D.Ed Special Education (Visual Impairment) PAPER: III Teaching of Expanded Core Curriculum                                                 Model Paper:   1 Paper Code: D.Ed. (V.I.)-103 Max. Marks: 45    खण्ड 1 इस खण्ड में दिये हुए सभी पांच प्रश्न हल कीजिये| प्रत्येक प्रश्न के लिये एक अंक निर्धारित हैं|     1*5= 5 1. अबेकस का सर्व प्रथम प्रयोग कहाँ पर किया गया? 2.व्यक्ति किस स्थान पर खड़ा किसके माध्यम से पाता करता है? अनुस्थिति ज्ञान/चलिष्णुता 3. छड़ी दिवस कब मनाया जाता है? 4. 6 बिन्दुओं की सहायता से ......... प्रतिरूप बनते है| 5. ब्रेल लिपि का अविष्कार किसने किया? खण्ड 2 इस खण्ड में दिये हुए सभी पांच प्रश्न हल कीजिये| उत्तर एक या दो वाक्यों में दीजिये| प्रत्येक प्रश्न के लिये दो अंक निर्शारित हैं| ...